Comprehensive Texts
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अथ मन्मथमन्त्रविधिं विधिना |
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अजकलाप्रथमावनिशान्तिभि |
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ऋष्यादिकाश्च संमो |
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अरुणमरुणवासोमाल्यदामाङ्गरागं |
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तरणिलक्षममुं मनुमादरा |
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मोहिनी क्षोभिणी त्रासी स्तम्भिन्याकर्षिणी तथा। |
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आशान्तिद्वयवाम |
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अनङ्गरूपा सानङ्गमदनानङ्गमन्मथा। |
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अनङ्गशिशिरानङ्गमेखलानङ्गदीपिका। |
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आलिख्यात्कर्णिकायामनलपुरपुटे मारबीजं ससाध्यं |
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प्रोक्त्वाथ कामदेवा |
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नत्यन्ते कामदेवाय प्रोक्त्वा सर्वजनं वदेत्। |
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वीप्सयित्वा ज्वलपदं प्रज्वलं च प्रभाषयेत्। |
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वशमुक्त्वा कुरुं वीप्स्य कथयेद्वह्निवल्लभाम्। |
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इति यन्त्रक्लृप्तकलशो बहुशः |
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वक्ष्ये विधानमन्य |
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अमृतोद्भवो मकरके |
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अरुणतरवसनमाल्या |
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अङ्गबाणावृतेरूर्ध्वं पूज्याः षोडश शक्तयः। |
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सुरता वारुणी लोला कान्तिः सौदामिनी तथा। |
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योनिर्मायावती चेति शक्तयः स्युर्मनोभुवः। |
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अपत्रपो युवा कामी चूतपुष्पो रतिप्रियः। |
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चतुर्थ्यामावृतौ पूज्याः स्युर्मारपरिचारकाः। |
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अपाङ्गभ्रूविलासौ द्वौ हावभावौ स्मरप्रियाः। |
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हृल्लेखया स्वनाम्ना च शक्त्यादीनां समर्चनम्। |
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मदनविधानमितीत्थं |
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विलसदहंकारतनु |
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इति मदनयोगरत्या |
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आत्मानं मदनं ध्यायेदाशुशुक्षणिरूपिणम्। |
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सुधामयीं च तद्योनिं नवनीतमयं स्मरेत्। |
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आलिङ्गेदग्निसंस्पर्शद्रुततद्रूपकामृतम्। |
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कुसुमास्त्रधिया बाह्ये स्पृशेत्कररुहैरपि। |
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रतावथोऽधोमध्योर्ध्वक्रमेणैवं समाहितम्। |
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साध्याख्या कामवर्णैः प्रतिपुटितलसत्कर्णिकं पत्रराज |
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हंसारूढो मदन |
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तारयुजा त्वमुनाग्नौ |
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दध्यक्ताभिर्जुहुया |
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अभिनवैः सुमनोभिरशोकजै |
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अभीष्टदायी स्मरणादपि स्मर |
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कुङा मध्यगताः ष्णायगोव्यर्णा यल्लमध्यगाः। |
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ऋषिस्तु नारदोऽस्य स्याद्गायत्रं छन्द इष्यते। |
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मूलमन्त्रचतुर्वर्णचतुष्केण द्विकेन च। |
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अव्यान्मीलत्कलापद्युतिरहिरिपुपिञ्छोल्लसत्केशजालो |
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अयुतद्वितयावधिर्जपः स्या |
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अङ्गाशेड्वज्राद्यैः |
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जुहुयाद्दुग्धहविर्भि |
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बालं नीलाम्बुदाभं नवमणिविलसत्किङ्किणीजालनद्ध |
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वन्द्यं देवैर्मुकुन्दं विकसितकरवन्दाभमिन्दीवराक्षं |
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विक्रान्त्या ध्वस्तवैरिव्रजमजितमपास्तावनीभारमाद्यै |
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त्रिकालमेवं प्रविचिन्त्य शार्ङ्गिणं |
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ग्रामं गच्छन्नगरमपि वा मन्त्रजापि मनुष्यो |
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भिक्षावृत्तिर्दिनमनु तमेवं विचिन्त्यात्मरूपं |
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ध्यानी मन्त्री मन्त्रजापी च नित्यं |
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एवं देवं पूजयन्मन्त्रमेनं |