Comprehensive Texts
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अथ संग्रहेण कथयामि |
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तारश्रीशक्तिमारावनिगणपतिबीजानि दण्डीनि चोक्त्वा |
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ऋषिरपि गणकोऽस्य स्या |
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प्रणवादिबीजपीठ |
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मन्दाराद्यैः कल्पक |
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ऐक्षवजलनिधिलहरी |
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रत्नमये मणिवज्र |
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सिंहमुखपादपीठग |
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बीजापूरगदेक्षुकार्मुकरुजाचक्राब्जपाशोत्पल |
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करपुष्करधृतकलश |
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मदजललोलुपमधुकर |
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अग्रेऽथ बिल्वमभितश्च रमारमेशौ |
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ध्येयौ च पद्मयुगचक्रदरैः पुरोक्तौ |
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ध्येयाः षट्कोणाश्रिषु |
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अग्राश्रावामोदः |
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सव्यापसव्यभागे |
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सिद्धिसमृद्धी चान्या |
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ध्यात्वैवं विघ्नपतिं |
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दिनशः स चतुश्चत्वा |
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मोदकपृथुका लाजाः |
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अनुदिनमर्चयितव्यो |
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तीव्रा ज्वालिनिनन्दे |
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सर्वयुतं शक्तिपदं |
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आद्या मिथुनैरावृति |
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दीक्षाभिषेकयुक्तः |
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मध्ये च दिग्दलानां |
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संपूजयेद्यथाव |
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इति जपहुतार्चनाद्यैः |
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स्वर्णाप्त्यै मधुना च गव्यपयसा गोसिद्धये सर्पिषा |
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पद्मैर्भूपतिमुत्पलैर्नृपवधूं तन्मन्त्रिणः कैरवै |
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मन्त्रेणाथ पुरामुनैव चतुरावृत्त्या समातर्प्य च |
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अथ गजलिप्सुर्नृपति |
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परिवीतदृढावरणं |
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उत्तरभागे तस्याः |
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ऊर्ध्वादिमेखलासु |
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आवाह्य विघ्नेश्वरमर्चयित्वा |
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आधाय वैश्वानरमत्र कुण्डे |
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तारेण लक्ष्म्यद्रिसुतास्मरक्ष्मा |
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पुनः समस्तेन च मन्त्रवर्ण |
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सचतुश्चत्वारिंश |
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करिकलभाः करिणीभिः |
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तेषां मातङ्गानां |
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मिथुनानां गणपानां |
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पुनरुद्धृत्य निवेद्या |
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प्रोक्तस्त्वेवं दशभुजमनुः संग्रहेणात्र भक्तो |
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स्मृतिपीठः पिनाकी सानुग्रहो बिन्दुसंयुतः। |
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चतुरीयो विलोमेन तारादिर्बिन्दुसंयुतः। |
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गणकः स्यादृषिश्छन्दो निचृद्विघ्नश्च देवता। |
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रक्तो रक्ताङ्गरागांशुककुसुमयुतस्तुन्दिलश्चन्द्रमौलि |
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दीक्षितः प्रजपेल्लक्षचतुष्कं प्राक्समीरितैः। |
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पीठे तीव्रादिभिः पद्मकर्णिकायां विनायकम्। |
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गणाधिपगणेशौ च गणनायकमेव च। |
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वक्रतुण्डैकदंष्ट्रौ च महोदरगजाननौ। |
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समर्चयेन्मातृवर्गं बाह्ये लोकेश्वरानपि। |
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नालिकेरान्वितैर्मन्त्री सक्तुलाजतिलैर्हुनेत्। |
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दिनशः सर्ववश्यं स्यात्सर्वकामप्रदं नृणाम्। |
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मधुरत्रयसिक्ताभिर्लाजाभिः सप्तवासरम्। |
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चतुर्थ्यां नालिकेरैस्तु होमः सद्यः श्रियावहः। |
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दध्यन्नलोणमुद्राभिहुनेन्निशि चतुर्दिनम्। |
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ईदृशं गणपं ध्यात्वा मन्त्री तोयैः सुधामयैः। |
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चत्वारिंशच्चतुःपूर्वं तत्पूर्वं वा चतुःशतम्। |
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नवनीते नवे लिख्यादनुलोमविलोमकम्। |
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समीरणं प्रतिष्ठाप्य जप्त्वाष्टशतसंख्यकम्। |
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अन्त्यासनोऽथ सूक्ष्मो |
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ऋषिदेवते तु पूर्वे |
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धृतपाशाङ्कुशकल्पक |
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भासुरभूषणदीप्तो |
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दीक्षायुक्तः प्रजपे |
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विघ्नविनायकवीराः |
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पूज्याः सितघृतपायस |
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एकमपि नालिकेरं |
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सह पृथुकेसक्तुलाजै |
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अष्टभिरेतैर्विहितो |
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अन्वहमन्वहमादौ |
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समहागणपतियुक्तै |
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बिम्बादम्बुदवत्समेत्य सवितुः सोपानकै राजतै |
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प्राग्भाषितानपि विधीन्विधिवद्विदध्या |
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इति जपहुतपूजातर्पणैर्विघ्नराजं |